पड़ाव, चंदौली। बहादुरपुर स्थित कामाख्या निवास में चल रही नौ दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा के अष्टम दिवस व्यास पीठ से पुराणवक्ता पूज्य श्री श्री अखिलानंद जी महाराज ने माता पार्वती के चरित्र और भगवान शिव-पार्वती विवाह की कथा का विस्तार से वर्णन किया। शिव विवाह का प्रसंग सुनकर कथा पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।
महाराज जी ने कहा कि सती के भस्म होने के पश्चात देवताओं ने भगवान शंकर से विवाह के लिए निवेदन किया। इसके बाद नारद जी हिमाचल के भवन में पहुंचे, जहां हिमाचल ने उनका स्वागत किया। नारद जी ने माता पार्वती को उनके पूर्व जन्म की कथा सुनाते हुए कहा कि उन्हें भगवान शिव की प्राप्ति के लिए कठिन तपस्या करनी होगी। नारद जी ने माता पार्वती को तपस्या की विधि बताई और शिव आराधना के लिए मंत्रोपदेश दिया।
गुरु की महिमा बताते हुए अखिलानंद जी महाराज ने कहा कि संसार में गुरु का विशेष महत्व है। गुरु के बिना किसी का कल्याण संभव नहीं है और न ही कोई कार्य पूर्ण रूप से सिद्ध हो सकता है। मानस में गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी कहा है— “गुरु बिन भव निधि तरइ न कोई।” उन्होंने कहा कि गुरु जीवन में प्रकाश प्रदान करते हैं और अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर भगवान की ओर गति प्रदान करते हैं। गुरु की कृपा से ही ईश्वर की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। इसलिए गुरु और भगवान एक-दूसरे के पूरक माने गए हैं। गुरु मोक्ष का द्वार हैं।

महाराज जी ने बताया कि नारद जी ने माता पार्वती को पंचाक्षर मंत्र प्रदान किया। इसके बाद माता पार्वती ने कठिन तपस्या की। उनकी कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें स्वीकार कर अपनी अर्धांगिनी बनाया।
इसके बाद हिमाचल की नगरी में माता पार्वती के विवाह की तैयारियां शुरू हुईं, वहीं कैलाश पर भगवान शिव का शिवगणों द्वारा भव्य श्रृंगार किया गया। भगवान शिव अपने गणों के साथ नंदी पर सवार होकर हिमाचल की नगरी के लिए रवाना हुए। शिव बारात में शिवगण हर-हर महादेव का जयघोष करते हुए चल रहे थे। भगवान शिव की अद्भुत शोभा देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।
जब शिव बारात हिमाचल के द्वार पर पहुंची तो भगवान शिव के स्वरूप को देखकर मैना मैया मोहित हो गईं। बाद में नारद जी के समझाने पर उनका भ्रम दूर हुआ। इसके बाद भगवान शिव विवाह मंडप में पहुंचे, जहां हिमवान ने विधि-विधान से माता पार्वती का कन्यादान किया। धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ।
कथा के दौरान शिव विवाह की भव्य झांकी प्रस्तुत की गई, जिसके दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। पूरे कथा पंडाल में हर-हर महादेव के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो गया।
कथा में विशिष्ट अतिथि के रूप में अनिल गुप्ता गुड्डू एवं मुगलसराय विधायक रमेश जायसवाल मौजूद रहे। मुख्य यजमान के रूप में कांति जायसवाल, शेखर जायसवाल एवं निधि जायसवाल रहे।
इस दौरान प्रमुख रूप से ओम प्रकाश जायसवाल, बबीता जायसवाल, धीरज तिवारी, अच्युतानंद पाठक, खुशबू जायसवाल, मनोज श्रीवास्तव, रवि गुप्ता, वीरेंद्र यादव, राजू तिवारी, विनोद जायसवाल, अजय सिंह राठौर, अंजलि राठौर, शिवम जायसवाल, अजय चौरसिया, यज्ञ नारायण सिंह, रेखा अग्रवाल, विनायक, शेखर गुप्ता समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और कथा का श्रवण किया।

