चंदौली। जिले के बुनकर बाहुल्य क्षेत्रों में जल निकासी की समस्या पिछले तीन दशकों से गंभीर बनी हुई है। बारिश के मौसम में हालात और भी खराब हो जाते हैं। कई गांवों में जलभराव के कारण लोगों के घरों में पानी घुस जाता है, जिससे बुनकरों के करघे और पावलू पानी में डूब जाते हैं। इससे बुनकरी का काम प्रभावित होने के साथ ही परिवारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। लगातार बनी इस समस्या के कारण कई परिवार गांव से पलायन करने को मजबूर हैं।

सरपोखी, दुलहैपुर, हरिशंकरपुर, इलौनी, मुहम्मदपुर और मलोकर समेत आसपास के कई गांव बुनकर बाहुल्य हैं। ग्रामीणों के अनुसार इन गांवों की करीब 90 प्रतिशत आबादी बुनकरी के कार्य से जुड़ी है। बारिश के बाद लंबे समय तक पानी जमा रहने से लोगों को आवागमन में परेशानी होती है और जलजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सरपोखी, हरिशंकरपुर, इलौनी और मुहम्मदपुर समेत जलभराव वाले गांवों के पानी की निकासी के लिए नजदीकी नहरों तक पानी पहुंचाने की ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए। ग्रामीणों ने केंद्र सरकार की जीराम जी योजना के तहत इस परियोजना को जिले की कार्ययोजना में शामिल कर स्थायी जल निकासी व्यवस्था कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि चंदौली को जहां ‘धान के कटोरे’ के रूप में पहचान मिली है, वहीं जिले के कई गांव बुनकरी और हस्तकला के लिए भी प्रसिद्ध हैं। यहां के कारीगर अपने हुनर से बेहतरीन साड़ियां और कपड़े तैयार करते हैं, जिन्हें देश-दुनिया में पहचान मिली है। लेकिन जलभराव और मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण बुनकर परिवारों के सामने पुश्तैनी कारोबार बचाने का संकट खड़ा हो गया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार से जल्द ठोस कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि स्थायी जल निकासी की व्यवस्था हो जाए तो कई गांवों के हजारों लोगों को राहत मिल सकती है और बुनकर परिवारों को रोजी-रोटी की तलाश में पलायन करने से रोका जा सकता है।

