प्रधान बनारसी लाल निषाद को श्रद्धांजलि देने उमड़ा जनसैलाब, जीवनी पर लिखी जा रही पुस्तक ‘एक था निषाद’

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वाराणसी। सूजाबाद के चार बार लगातार ग्राम प्रधान रहे स्वर्गीय बनारसी लाल निषाद के तेरहवीं संस्कार एवं ब्राह्मण भोज कार्यक्रम में शनिवार को श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, गणमान्य नागरिकों और नगरवासियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके सामाजिक योगदान को याद किया।

श्रद्धांजलि सभा में लोगों ने कहा कि बनारसी लाल निषाद अपनी साफ-सुथरी छवि, सादगीपूर्ण जीवन और समाजसेवा के लिए विशेष रूप से पहचाने जाते थे। उन्होंने अपने कार्यकाल में समाज के कमजोर और जरूरतमंद लोगों की मदद को प्राथमिकता दी। लोगों के अनुसार, जिले में बड़ी संख्या में विधवा महिलाओं को पेंशन योजना का लाभ दिलाने का रिकॉर्ड भी उनके नाम रहा।

गंगा किनारे से लेकर गांव की गलियों और सड़कों तक बनारसी लाल निषाद की सक्रियता और जनसेवा की चर्चा होती थी। यही कारण रहा कि उनके अंतिम संस्कार और तेरहवीं कार्यक्रम में हर वर्ग और विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े लोग बड़ी संख्या में पहुंचे।

उनके भतीजे दर्शन निषाद ने बताया कि उनके चाचा को बनारस के नाविक समाज के लोग भी बेहद सम्मान देते थे। वह निषाद समाज के हर पहलू में सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए हमेशा आगे रहते थे। उनकी समाजसेवा का उद्देश्य किसी लाभ की अपेक्षा नहीं, बल्कि निःस्वार्थ सेवा रहा।

दर्शन निषाद ने बताया कि बनारसी लाल निषाद ने 12 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा पूरी की थी और वह आध्यात्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति भी थे। देश के कई प्रमुख नेताओं के साथ उनके चित्र उनके संघर्षपूर्ण जीवन की कहानी बताते हैं। उनके अनुसार, राजनाथ सिंह, मुलायम सिंह यादव, मुरली मनोहर जोशी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई प्रमुख नेताओं से उनके संपर्क रहे।

परिजनों के मुताबिक, बनारसी लाल निषाद को विरासत में कोई विशेष राजनीतिक या सामाजिक पहचान नहीं मिली थी। उन्होंने अपने संघर्ष, मेहनत और जनसेवा के बल पर समाज में अपनी अलग पहचान बनाई। परिवार के छोटे भाई अशोक निषाद तथा बड़े भाई अमेरिका निषाद, जिनकी उम्र करीब 87 वर्ष है, आज भी उनके बचपन और संघर्ष के दिनों की कहानियां सुनाते हैं।

दर्शन निषाद ने बताया कि सूजाबाद के नगर क्षेत्र में शामिल होने के बाद भी हर बिरादरी के लोगों ने उनके चाचा को सम्मान दिया। उन्होंने कहा कि परिवार के लोगों को भी समाज में जो सम्मान मिला, उसमें बनारसी लाल निषाद के कार्यों और मेहनत का बड़ा योगदान रहा।

इस दौरान उनके परिवार के सदस्य पत्नी, बेटी, दामाद, भतीजे दर्शन निषाद, राजेश निषाद, लालबाबू निषाद, बिनोद निषाद, छोटे भाई अशोक निषाद और बड़े भाई अमेरिका निषाद सहित बड़ी संख्या में रिश्तेदार और शुभचिंतक मौजूद रहे।

बनारसी लाल निषाद के जीवन और संघर्ष को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से उनके भतीजे दर्शन निषाद उनकी जीवनी पर एक प्रेरक पुस्तक लिख रहे हैं। पुस्तक का नाम ‘एक था निषाद’ रखा गया है। दर्शन निषाद के अनुसार, यह पुस्तक उनके चाचा के संघर्ष, समाजसेवा, सादगी, आध्यात्मिक जीवन और सामाजिक सरोकारों को सामने लाने का प्रयास है।

तेरहवीं संस्कार कार्यक्रम में दिनभर महिला-पुरुषों सहित विभिन्न वर्गों के लोगों का पहुंचना जारी रहा। श्रद्धांजलि देने पहुंचे लोगों ने कहा कि बनारसी लाल निषाद ने अपना जीवन समाज को जागरूक और संगठित करने में लगा दिया। उनके निधन से समाज ने अपना एक ऐसा व्यक्तित्व खो दिया है, जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।

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