चंदौली। पुलिस विभाग में स्थानांतरण आदेशों के अनुपालन को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विभागीय स्तर पर जारी पूर्व स्थानांतरण सूची में नाम होने तथा गैरजनपद स्थानांतरण के बावजूद कुछ पुलिसकर्मियों के कथित तौर पर पुराने स्थानों पर बने रहने की बात सामने आ रही है। खासतौर पर कार्यालयों में तैनात कुछ कर्मचारियों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।चर्चा है कि जहां सिपाही और दीवान स्तर के कर्मचारियों को लगातार इधर से उधर स्थानांतरित किया जा रहा है, वहीं कुछ चुनिंदा कर्मचारियों के पुराने स्थान पर बने रहने से विभाग में असमानता की चर्चाएं हैं। इससे स्थानांतरण प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।वहीं, सीआर (CR) और स्थानांतरण सूची को लेकर कथित मनमानी तथा लेन-देन की चर्चाएं भी विभागीय गलियारों में सुनाई दे रही हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।एक कर्मचारी के पेशकार से दीवान और फिर दरोगा बनने तथा गैरजनपद स्थानांतरण के बाद भी कथित रूप से पुराने स्थान पर बने रहने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।अब निगाहें पुलिस अधीक्षक पर हैं कि क्या पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा कर स्थानांतरण आदेशों का समान रूप से अनुपालन कराया जाएगा। सवाल है—आदेश सबके लिए बराबर हैं तो उनका अमल भी सब पर बराबर क्यों नहीं?

