गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर श्री सर्वेश्वरी समूह द्वारा आयोजित सायंकालीन गोष्ठी में पूज्यपाद बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम जी ने कहा कि गुरु की वास्तविक प्रसन्नता केवल उनकी स्तुति करने में नहीं, बल्कि उनकी शिक्षाओं को जीवन में उतारने और श्रेष्ठ आचरण अपनाने में निहित है। उन्होंने कहा कि ज्ञान तभी सार्थक है, जब वह व्यवहार में दिखाई दे। गुरु अपने शिष्यों की सफलता, सदाचार और उत्तम चरित्र से सबसे अधिक प्रसन्न होते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने अंतःकरण का स्वयं साक्षी है, फिर भी कुसंगति और महापुरुषों की शिक्षाओं की उपेक्षा के कारण वह अनुचित कार्यों में लिप्त हो जाता है। विशेष रूप से युवाओं का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि वे सत्संग, सद्ग्रंथों और गुरु-वाणी से जुड़ें तथा अपने जीवन को समाज और राष्ट्र के लिए उपयोगी बनाएं। उन्होंने कहा कि हिंसा, स्वार्थ, पारिवारिक कलह और नैतिक पतन जैसी प्रवृत्तियों से बचने का एकमात्र उपाय सदाचार और सत्संग है।
पूज्य गुरुदेव ने संत कबीरदास के प्रसिद्ध दोहे “दुर्बल को न सताइये…” का उल्लेख करते हुए कहा कि निर्बल, पीड़ित और असहाय लोगों पर अत्याचार अंततः स्वयं के कर्मों का विनाश करता है। कर्म का विधान अटल है और प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्मों का फल अवश्य प्राप्त होता है। इसलिए अहंकार, अन्याय और शोषण से दूर रहना ही कल्याण का मार्ग है।
उन्होंने समाज में बढ़ती नकारात्मक मानसिकता, अंधविश्वास, महिलाओं एवं कमजोर वर्गों पर हो रहे अत्याचार तथा मिलावटी खाद्य पदार्थों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रकृति अन्याय को अधिक समय तक सहन नहीं करती और समय आने पर स्वयं संतुलन स्थापित करती है। उन्होंने बौद्ध भिक्षु, मछुआरे की पत्नी, कुत्ते और मछली के प्रसंग के माध्यम से कर्मफल की महत्ता समझाते हुए कहा कि प्रत्येक कर्म का प्रभाव दूरगामी होता है।

अपने संबोधन के अंत में पूज्य गुरुदेव ने कहा कि आज प्रत्येक व्यक्ति को साधु की करुणा, सत्य, संयम और सदाचार के साथ सैनिक का साहस, अनुशासन एवं राष्ट्रसेवा का भाव भी अपनाना चाहिए। उन्होंने सात्त्विक जीवन, नियमित अध्ययन, आत्मचिंतन और अघोरेश्वर के साहित्य के मनन को आत्मकल्याण का सर्वोत्तम मार्ग बताया। उन्होंने कहा कि “जीव ही शिव है” का अनुभव वही व्यक्ति कर सकता है, जो अपने जीवन में श्रेष्ठ कर्म और गुरु-वाणी का पालन करता है।

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित इस गोष्ठी में शिष्यों एवं श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए पूज्यपाद बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम जी ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं के पूर्व अपर महानिदेशक डॉ. विजय प्रताप सिंह ने की। मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ के एडीजीपी विवेकानंद उपस्थित रहे। अन्य वक्ताओं में भोलानाथ त्रिपाठी, डॉ. धनंजय राव, डॉ. अजय सिंह, वरिष्ठ पत्रकार प्रबल प्रताप सिंह, उदय नारायण पांडेय तथा शशिभूषण सिंह ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन संस्था के व्यवस्थापक हरिहर यादव ने किया।

